शाम को फिर वो एक नई ड्रेस में आई … घाघरा और चोली में… वास्तव में कमली एक बहुत सुन्दर लड़की थी। चाय लेकर आई थी।“भैया … अब बोलो कशी लागू हूँ …?” (अब बोलो कैसी लग रही हूँ?)“परी … जैसी लग रही हो …!”“तो मने चुम्मा दो … !” वो पास आ गई…मुझसे रहा नहीं गया, मैंने उसकी पतली कमर में हाथ डाल कर अपने से सटा लिया और गाल पर जोर से किस कर लिया। उधर मेरे लण्ड ने भी सलामी दे डाली … वो खड़ा हो गया। उसने खुशबू लगा रखी थी। जोर से किस किया तो बोली,”भैया … ठीक से करो ना … !”मैंने उसे अपने से और चिपका लिया और कहा, “ये लो … !” उसके गाल धीरे से चूम लिये…फिर धीरे से होंठ चूम लिये… उसने आंखें बंद कर ली… मेरा लण्ड खड़ा हो गया था और उसकी चूत पर ठोकर मारने लगा। शायद उसे अच्छा लग रहा था… मैंने उसके होंठ को फिर से चूमा तो उसके होंठ खुलने लगे… मेरे हाथ धीरे से उसके चूतड़ों पर आ गये … हाय … इतने नरम … और लचीले…अचानक वो मुझसे अलग हो गई,”ये क्या करते हो भैया… !”“ओह … माफ़ करना कमली … पर आप भी तो ना … ” मैंने उसे ही इस हरकत के लिये जिम्मेदार ठहराया।वो शरमा कर भाग गई।क्या… मेरी किस्मत में










