उनकी चूत बालों से बिल्कुल साफ़ थी. हिंदी XXX वो बहुत खुश नज़र आ रही थीं जिस से ज़ाहिर होता था के मेरे नफ्सीयाती हार्बे कामयाब हो रहे थे. फिर मैंने फूफी हिफ्ज़ा के मम्मों के नीचे पेट से ऊपर नाप लिया. मैंने उठ कर अपने शॉर्ट्स उतार दिये और उनका हाथ अपने खड़े हुए लंड पर रखा. वो कुछ देर खामोश रहीं लेकिन फिर कहा अच्छा ठीक है.मैंने अवारी होटेल लाहोर में एक रूम बुक करवया और मुकरर दिन लाहोर एरपोर्ट पर उन्हे रिसीव किया. उन्होने अचानक अपनी हथेली नीचे कर के मेरे टट्टे अपने नरम हाथ में लिये तो मेरे जिसम में सनसनी दौड़ गई. बहुत सी चीज़ों की तो मुझे ज़रूरत भी नही थी और तुम ने फिर भी खरीद लीं.” उन्होने कहा.“फूफी हिफ्ज़ा कोई बात नही मैंने अगर आप के लिये चंद चीजें खरीद लीं तो किया हो गया.” मैंने जवाब दिया.“तुम बताओ तो सही तुम्हारे कितने पैसे लगे? मै सुबह से ही फूफी हिफ्ज़ा के मम्मों को देख रहा था मगर अब उनके गैर-मामूली मम्मों का नज़ारा कर के मज़ा आ गया. चूँके बेड का मॅट्रेस बहुत नरम था इस लिये मुझे फूफी हिफ्ज़ा के सेहतमंद बदन का वज़न मुझे अपने ऊपर ज़ियादा नही लग रहा था.और में क़िस्सी ना क़िस्सी तरह अपना लंड उनकी चूत में अंदर बाहर कर रहा था.















