वेरी सॉरी,” और अपनी रुमाल निकाल कर साफ़ करने की कोशिश करने लगा, “प्लीज़.. लखनऊ से ही बोल रही हूँ यार। बता क्या हाल-चाल है?” आयशा ने पुछा।“बस कुछ नही। तू आज कल किसके साथ एय्याशी कर रही है?” मैंने हंसते हुए कहा।“कहाँ यार। अभी तो कोई मुर्गा ही ढुंढ रही हूँ? XXX Hindi तू भी क्या अभी सेक्रेटरी बनी हुई है या मेरे जैसी बन गयी,” आयशा बोली।“तेरी तरह बन जाऊँ? तू भी क्या अभी सेक्रेटरी बनी हुई है या मेरे जैसी बन गयी,” आयशा बोली।“तेरी तरह बन जाऊँ? सिर्फ एक रात के लिये!!!” मेरा मुँह ये कहते हुए खुला ही रह गया। यह रकम कोई छोटी नही होती किसी भी लड़की के लिये। कोई भी तैयार हो जाये। तभी मेरे मन में और एक विचार आने लगा। और यह रकम मुझे मिल जाये तो…. लखनऊ में हो या कहीं और…” मैंने फोने लगाते ही पुछा।“ग़ज़ल। व्हॉट ए ग्रेट सरप्राइज़! मतलब?” मुझे कुछ समझ में नही आया।“घरेलू यानि घरेलू। अरे बड़ा रंगीन मिज़ाज़ है। उसे बज़ार की औरतें नही बल्कि घरेलू औरतें चाहिये। अब यह सब कहाँ से लाऊँ मैं?” बॉस ने समझाते हुए कहा।अब समझ में आया। बाज़ार की औरतें नहीं… यानि वेश्या नहीं… घर की औरतें चाहिये चोदने के लिये। यानि पूरा रंगीन मिज़ाज़ था आफ़िसर। यूँ तो बॉस ऐसी बातें मुझसे नही करता लेकिन आज परेशानी में वो खुलकर बोल










