चूत से लगा जैसे अंदर किसी ने एक छोटा गिलास वीर्य उलट दिया हो, धार सी बह निकली ! सुबह पूरा उजाला होने का एहसास हुआ, तो उठने की कोशिश की, पर अभी भी भैया का लण्ड पूरी तरह से मेरी चूत में भरा था !मैंने धीरे धीरे निकलने की कोशिश की, भैया सोते हुए बहुत अच्छे लग रहे थे !हलके हलके आगे पीछे करते करते मैंने लगभग चुदाई का ही मज़ा ले लिया, जोश इतना आ गया की चूत ने पानी छोड दिया, फिसलन में लण्ड बाहर ! XXX Hindi मैं बहुत डर गई थी कि भैया क्या गाँड मरने वाले हैं माधुरी की ! मेरे कमरे तक इतनी आवाज़ आ रही थी कि मुझे लग रहा था कि मेरे कमरे में लण्ड चुसाई चल रही हो !जेठ जी ने माधुरी कि ब्लाउज उतार दी, दो मस्त चूचियाँ फुदक के बाहर आ गई !माधुरी कि सुडौल चूचियाँ हवा में लटक रहे थे, एक बच्चे कि माँ होते हुए भी चूचियाँ अभी तक अपने आकार में थी ! अब मेरी दो ऊँगली आराम से मेरी चूत के अंदर बाहर हो रही थी! मैंने सामने पड़े ब्रा और पैंटी से उसे पोछना शुरू कर दिया ! दूसरे कमरे में अच्छी रौशनी थी, सब कुछ साफ़ साफ़ दिख रहा था ! भैया को पलंग पर बिठाया, खुद उनके गोद में बैठ गयी, और भैया को इशारा















