बस मे तो लंड को अपनी गांद पर कपड़ों के उपर से ही महसूस करके रह जाना पड़ता था. हिंदी XXX पर उपरी मन से बाहर जाने को कह रही थी.अरे यार तुम्हारी मर्ज़ी पर मैं ये कह रहा था की अगर घाव गहरा हुआ तो तुम्हे तकलीफ़ होगी तुम ये घाव डॉक्टर को दिखा पाओगे क्या. श्रृष्टि ने जान बुझ कर बाथरूम का दरवाजा बंद नही किया था. इस लिए ही मैने तुम्हे मेसेज किया था. ऐसा करते है की कॅंटीन मे मिलते है.“कॅंटीन. ये कोई दिखाने की जगह है. दोनो कॉलेज कॅंटीन मे आ गए ओर जन्मेजय ने कॉफी का ऑर्डर दे दिया ओर साथ मे स्नॅक्स का भी. तुम ज़रा चड्डी थोड़ी ओर हटाओ.ओर नही हटेगी चड्डी अगर देखनी हो तो देख लो इतने मे से ही.ओक मैं कोशिश करता हू. पर जब दोस्त आती जाती रहती है तब तो मौका ही मौका है.कुच्छ देर बाद मैं माँ के पास गई ओर बोली माँ मैने तुम्हे कहा था ना की पापा से बात कर लेना. चल श्रृष्टि जल्दी कर अंदर चल” श्रृष्टि ये सोचते हुए उसके पीछे अंदर भागी. श्रृष्टि तब तक अपने दर्द को दबा चुकी थी उसने कहाँ नही जन्मेजय तुम करो दर्द नही हो रहा है ओर अगर मैं दर्द से चीखून भी तो तुम मत रुकना वरना हम कभी भी मज़ा नही ले पाएँगे.जन्मेजय उसकी जिंदादिली को















