मैं पलट गया और उसने फिर अपनी लहराती सांप जैसी गरम जीभ मेरी गांड के सुराख पर रख दी. फिर शालू उठ कर बोली…. हिंदी XXX उसने लंड को ज़ोर ज़ोर से दबाया और सारा बचा खुचा रस निचोड़ दिया.मुझे बड़ा अच्छा लगा. एक घड़े पानी में क्या नहाऊं. आपका काम यूं ही हो जाएगा साब…. मेरी तो चीख़ निकलते निकलते रह गई. पैंट की ज़िप खोल कर उसने अंडरवेयर के साथ पकड़ कर पैन्ट को नीचे घसीटा और दूसरे ही पल मैं नंगा हो गया, पूरी तरह. दोनों जांघों के बीच उसकी चूत बड़ी मुलायम और कुंवारी सी थी. इतनी मंहगी चाय !” चाय तो मुफ्त में मिलेगी साब…. वो भी संभल कर सही तरह से लेट गई. शालू की समझ में भी ये बात आ गई और उसने अपनी दोनों टांगें फैला दीं.एक तकिया ले कर उसे चूतड़ के नीचे रख दिया. बिजली मेरे होंठों को चूसती जा रही थी. जैसे किसी स्रोत से पानी फूट पड़ता है. कंपनी को दो हज़ार का चूना लगाऊंगा. तुम भी मालिश करती हो?”नहीं हम तो… वो बोलते बोलते रुक गई.शालू बोली… “ये डायरेक्ट काम करती है साब… मालिश का झगड़ा ही नहीं.”मैने ग़ौर से बिजली को देखा तो वो मुझे इतनी बुरी नहीं लगी.















