मैं दरवाजा बंद कर लेता हूँ और मुँह फेर लेता हूँ।मालकिन- ठीक है तुम मुँह उधर फेर लो।मैंने दरवाजा बंद किया और मुँह फेरकर खड़ा हो गया। नीचे फर्श पर देखा तो चीनी का डब्बा खुला होने के कारण बहुत सारी चींटियां जमीन पर घूम रही थीं। मुझे अपना काम बनाने की एक तरकीब सूझी, मैंने चार-पांच चींटियां उठाई और मुट्ठी में बंद कर लीं।मालकिन उसमें तो कुछ भी नहीं है।मैं- भाभी यहाँ देखो बहुत सारी चींटियां हैं शायद सलवार के सहारे चढ़ गई हों। आप मुँह फेर लो मैं देख लेता हूँ।वो मुँह फेरकर खड़ी हो गई तो मैंने चेक करने के बहाने पीछे से उनकी सलवार को थोड़ा सा खींचा और मुठ्ठी में दबाई हुई चींटियां उसके अन्दर डाल दीं। जो जल्दी ही अन्दर घुस गईं।मैं- भाभी, तुम्हारी कमर पर और पीठ पर चींटी ने काटा है। पीठ लाल हो गई है। तुम कहो तो तेल लगा दें। दर्द कम हो जाएगा।उनके ‘हाँ’ कहते ही मैंने तेल लगाने के बहाने उनकी पीठ और कमर को सहलाना शुरू कर दिया। उन्हें भी अच्छा लग रहा था।मैं- “भाभी, तुम्हारी ब्रा को पीछे से खोलना पड़ेगा। नहीं तो उसमें सारा तेल लग जाएगा। तुम आगे से उसे हाथ से पकड़ लो। मैं पीछे से इसे खोल रहा हूँ…”“ठीक है…” वो बोली।मैंने उनकी ब्रा खोल दी। जिसे उन्होंने आगे से हाथ लगाकर संभाल लिया।

![हिंदी अडल्ट वेबसीरिज – आखिरी ख्वाब की रात [भाग 2]](https://xxxhindi.lol/wp-content/uploads/2026/05/e0a4b9e0a4bfe0a482e0a4a6e0a580-e0a485e0a4a1e0a4b2e0a58de0a49f-e0a4b5e0a587e0a4ace0a4b8e0a580e0a4b0e0a4bfe0a49c-e0a486e0a496.png)













