ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.गोपी इस सब से अनजान थी. हिंदी XXX रूकने नाम ही नहीं ले रही थी. छुटने की वो पूरी कोशिश कर रही थी. उसको पूरी तरह मेरे निचे दबोच रखा था. अब मैंने इसका फायदा उठाना शुरू किया. आधे मिनट में मेरे लंड ने उसकी चिर ढून्ढ निकाली और जगह बनाई. अब समृद्धि को भूल जाऊ या क्या करू मेरी कुछ नहीं समझ में आ रहा था. उसके आंखो मे बहुत मस्ती थी मुझे घूर घूर कर चोद रही थी. बीच बीच में चूची भी ऊंगलियो मे दबाता रहा.“धीरे दबाओ विशु, दर्द हो रहा है.”“साली मर्द तो दर्द ही देगा, तुझे पसंद नहीं तो उठ.” मैंने डायलाग मारा.इससे वो गरम हो गयी और खुन्नस में बोली “ले दबा और दबा” और दांत दबा के उछलने लगी. अब मैंने इसका फायदा उठाना शुरू किया. मैं 20-25 मिनट में उसके घर पर पहुंचा. मैंने किस करने के लिए होंठ उसके होंठ पर रख दिए. रूकने नाम ही नहीं ले रही थी. मैं घुटनो पर उसके सामने बैठ गया. उसे दर्द तो यक़ीनन हो रहा था पर वो बर्दास्त कर रही थी. त्रिकोण थे पूरी कसावट थी. उसके स्किन एकदम दूधिया है. दोनों मम्मे मेरे हाथ में भरकर उसे मेरी आगोश में दबोच लिया. और उसके होटों पर ऊंगलिया फेर रहा था होंठो को मसल रहा था. मैंने अब क्या करना















