अच्छा मुझे लगा शायद मुझे जानते होंगे, या अमरीश के दोस्त या क्लासमेट होंगे।जैकी — नही नही आंटी, और ये अमरीश कोन है?माँ — (मेरी तरफ इशारा करते हुए) — ये है मेरा बेटा अमरीश।जैकी — (मेरी तरफ हाथ बढ़ाकर) — हलो साब, कैसे हो आप ?मैं — बहुत बढ़िया भाई, आप सुनाओ, कहाँ से हो ?जैकी — मैं मेवाड़ से हूँ और आप ?मैं — वाओ, इटस अमेज़िंग, मैं मुंबई से हूँ।मैं — आपका कोनसा एरिया है मुंबई में ?उसने एक अजीब सी जगह का नाम बताया।मैं — माफ़ करना भाई, मैंने ये नाम पहले कभी नही सुना।वो — चलो कोई बात नही यार। हम इतनी दूर आकर मिले है। यही बहुत बड़ी बात है।वो हर बार बात करते करते मम्मी के बदन को भूखी निगाहों से घूरे ही जा रहा था। मुझे ये देखकर अच्छा तो नही लग रहा था। परन्तु इतने लोगो की भीड़ में अपनी इज़्ज़त का ख्याल सोचकर चुप चाप उसकी चोरी पकड़ रहा था।इधर माँ को भी पता नही क्या सूझ था। उस से दूर होने की बजाए उस से बाते किये ही जा रही थी। शायद उसको अच्छा लग रहा होगा। इतने में सबका डांस करने का मूड बन गया।जैकी ने शक्ति को आँख के इशारे से दो गिलासो में पेग बनाकर लाने को कहा। कुछ ही पलों में ट्रे में दो कांच के गिलास
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भारतीय छात्रों की असली यौन कहानियाँ
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