प्रतिमा एक दम खड़ा हो कर अपने बेटे के सर पर हाथ फेरती है.“बस बेटा बस…..अब हो गया….अब तुम्हे तकलीफ नहीं होगी”.“उफ़… मेरी…हाए….जान निकल……आह्ह्हह्ह…..आप मेरी माँ हो कि दुश्मन” रिशु अब समझा था कि उसकी माँ ने जान बुझकर उसे बातों में फंसाया था कि उसका ध्यान हटते ही वो ज़िपर खोल देती. XXX Hindi उधर प्रतिमा के लिए अब इस गति से अन्दर बाहर हो रहे लंड को चुसना संभव नही था. तीन बेडरूम का घर काफी खुला डुला था. लंड का कठोर रूप अब उसके सामने था और वो रूप उसके तन बदन में आग लगा रहा था. वो तो उसकी हर जरूरत को हर शौंक को पूरा करने कि कोशिश करता था.वो तो उसकी शरीरक जरूरतों को भी हमेश पूरा करने की कोशिश करता था और करता भी क्यों नहीं, प्रतिमा जैसी खूबसूरत औरत किस्मत से मिलती है. उसने आज से पहले कभी भी अपने बेटे को गलत निगाह से नहीं देखा था तो आज फिर अचानक कैसे वो एकदम से उसके साथ सारी हद्दें पार करने को तैयार हो गई?इस क्यों का जवाब शायद उसके पती के अचानक छुट्टियों में घुमने जाने का प्रोग्राम कैंसिल करने से था. प्रतिमा अपने पति की उस ताबड़ तोड़ चुदाई से बहुत ज़बरदस्त आनंद महसूस कर रही थी. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है. उसको इतना चोदता था कि वो















