तुम शर्म करो.. हिंदी XXX ऐसा मत करो… पागल हो गए हो क्या?पर मैं उसकी बातों को अनसुना कर उसके चेहरे को चूमने लगा। वो शर्म से लाल होने लगी थी।वो बार-बार मुझे यही कहने लगी- मामा प्लीज… अब छोड़ दो बहुत हो गया…मैंने उसके होंठों को चूमते हुए बोला- अभी तो शुरू हुआ है… अभी कैसे छोड़ दूँ।मैंने उसकी एक चूची को पकड़ के हौले से दबा दिया।ओजस्वी सिहर उठी और झट से मेरा हाथ पकड़ लिया और बोली- मामा यह गलत है, बड़ी बदनामी होगी।पर उसकी चूची को पकड़ते ही मेरी मस्ती और भड़क उठी थी।मैं बोला- गलत कुछ नहीं है… मेरी जान, यही तो जवानी का असली मजा है। जो जी भर के लूटा जाता है…यह कहते हुए मैंने अपना एक हाथ उसकी पीठ को सहलाने और दूसरे हाथ से उसकी चूची को दबाते हुए उसके बालों को हटा कर उसकी गरदन पर चूमने लगा तो ओजस्वी मुझसे कस कर लिपट गई। अब ओजस्वी में भी मस्ती छाने लगी थी। वो भी कसमाने लगी थी। उसका विरोध अब केवल मुँह से ही रह गया था।‘मामा प्लीज, मुझे डर लग रहा है, आप समझते क्यों नहीं… कोई आ जाएगा।’‘डरो मत, कोई नहीं आएगा..















