देवता.. शैरी.. हिंदी XXX क्या ये तुम हो.. यूं एकाएक किसी से नहीं मिलते। और आप जिस वजह से बाबा से मिलना चाहती हैं। वह उचित है भी। या नहीं?आंटी ने मुझे भीङ से हटकर एक तरफ़ आने का इशारा किया।और एकान्त में आते ही बोली – जीतेन्द्र ! वो जो कोई नही जानता..। तो लूढा से मेरी कनेक्टिविटी जुङी समझो।अतः मैं बार बार कहने लगा। तो तू ही बता दे.. मैं असली जो आ गया..।उसने अविश्वसनीय निगाहों से मुझे देखा। मैं उसे सोचने का कोई मौका नहीं देना चाहता था। मैंने अजगर को छीनकर बाबाजी को स्मरण किया। और उनकी गुफ़ा को लक्ष्य बनाकर अलौकिक शक्ति का उपयोग करते हुये अजगर को पूरी ताकत से अंतरिक्ष में फ़ेंक दिया।अब ये अजगर अपनी यात्रा पूरी करके गुफ़ा के द्वार पर गिरने बाला था। और इस तरह से टिंकू की रूह प्रेतभाव से आधी मुक्त हो जाती। इसके बाद टिंकू के दिमाग (जो अब मेरे दिमाग से जुङा था) से मुझे वह लिखावट (फ़ीडिंग) मिटा देनी थी। जो उसके और शैरी के वीच हुआ था। बस इस तरह टिंकू मुक्त हो जाता।इस हेतु मैंने शैरी को बेहद उत्तेजित भाव से पकङ लिया। और पूरी तरह कामुकता में डुबोने की कोशिश करने लगा। शैरी सम्भोग के लिये व्याकुल हो रही थी।जब मैंने कहा – हे..















