मेरी चूत से मीठी आनंदमई तरंगे निकल रही थी जो मेरी जाँघों और नाभि दोनों तरफ जा रही थी. मेरी चूत की लाल लाल फाकों पर पापा के ओंठ थे. हिंदी XXX इस समय मैं उनके विशाल सीने पर लेती थी और चुदवा रही थी. फिर पापा निचे जमीन पर बैठ गये. आज पापा ने एक बार फिर से मुझे नंगा कर दिया और मुझे अपने सीने पर लिटा लिया. इस तरह से खड़े होकर चोदने में मुझे जादा गहराई तक लौड़ा खाने को मिल रहा था. फिर रसोई में नग्न अवस्था में ही खाना बनाने चली गयी. मेरी चूत से मीठी आनंदमई तरंगे निकल रही थी जो मेरी जाँघों और नाभि दोनों तरफ जा रही थी. आज के लिए मैं अपने सगे बाप की औरत बन चुकी थी.आज के लिए मैं पापा की प्यारी रंडी बन गयी थी. पापा के हाथ मेरी लटकती छातियों पर थे.जिस तरह से किसी मंदिर की घंटियाँ लटकती रहती है ठीक उसी तरह मेरी नुकीली छातियाँ भी मेरे सीने से लटक रही थी. दुपट्टा तक मैंने नही डाला था.क्यूंकि पापा का आदेश था की आज हम बाप बेटी नग्न अवस्था में ही रहे. वो अपनी धुन में थे.















