अई …..अई..मम्मी….” की आवाजे आती रहती थी।जब मैं इस तरह की गर्म गर्म आवाजे सुनता था तो दिल करता था की सब नाते रिश्ते छोड़कर बस चाची को जाकर कसके चोद लूँ। उनका फिगर ही इतना मस्त था की किसी भी मर्द का लौड़ा खड़ा हो जाता अगर वो एक बार मेरी चाची को देख लेता।साल भर तक चाचा ने चाची को खूब बजाया। उनको चोद चोदकर उनकी बुर फाड़ दी। फिर चाचा को एक महीने के लिए उनके बोस ने वापी भेज दिया। चाचा का मन तो नही था पर नौकरी तो करनी ही थी। इसलिए वो अपने दिल पर पत्थर रखकर वापी चले गये।इधर जैसे ही रात होती चाची नंगी हो जाती और अपनी चूत में ऊँगली करने लग जाती। मैंने चाची को ऐसा करते कई बार देखा था। मुझसे रहा ना गया। मैं अपनी खूबसूरत और जवान चाची की बुर चोदना चाहता था। मैं वासना और कामुकता से पागल हो रहा था।मुझे अब हर हालत में अपनी जवान और खूबसूरत चाची की बुर चोदनी थी। मैं गया और मैंने रात के ११ बजे चाची के दरवाजे पर दस्तक दे दी। रोज की तरह चाची आज भी नंगी थी और अपनी चूत में खुद ही ऊँगली करके फेट रही थी।“चाची… दरवाजा खोलो! XXX Hindi .उई..उई…….माँ….ओह्ह्ह्ह माँ……अहह्ह्ह्हह…” की सिस्कारे भी निकाल रही थी। वो किसी घोड़ी की तरह मेरे लौड़े की सवारी कर















