जॉब से पहले दीदी अपने ससुराल में रहती थीं.मेरे लिए वहां का माहौल बिल्कुल ही नया था और इससे पहले मैं कभी बहनों के साथ नहीं रहा था. हिंदी XXX दीदी की शानदार गांड और टाइट बूब्स देख कर मेरा तो हमेशा ही मन करने लगता था उनकी चुदाई करने का, पर कुछ नहीं हो पाया. ये नहीं कि चुपचाप दूध पी ले.उनके मुँह से ये सब इतना खुला सुनकर अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था. कुछ दिन बाद जब दीदी की बच्ची पैदा हुई थी, तब से मुझे उनको चोदने का और मन करने लगा था. हम दोनों ने भरपूर किस किया और एक दूसरे के मुँह में जीभ डालकर एक दूसरे की लार को पिया. काफी देर तक मेरे लंड से चुदने के बाद दीदी की चुत से माल गिरने लगा था. मेरी छोटी दीदी मेरे से काफी फ्रेंडली थीं और बहुत अच्छी थीं. मैंने दीदी की टांगों में अपना सर घुसाया और उनकी गांड को भी चूसा.तभी दीदी एकदम से गनगना उठीं और बोलीं- आह अनुज अब अन्दर डाल दो… प्लीज अपना लंड चुत में पेल दी. फिर मैं अपने कमरे जाकर सो गया लेकिन पूरी रात सो ही नहीं पाया. ये नहीं कि चुपचाप दूध पी ले.उनके मुँह से ये सब इतना खुला सुनकर अब मुझसे कंट्रोल नहीं हो रहा था.















