अब हम दोनों बिल्कुल नंगे एक दूसरे के सामने खड़े थे. उसके बाद दीदी ने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिये. हिंदी XXX मैं जैसे ही अंदर घुसा तो दीदी ने कहा- मैं तुम्हारा ही इंतज़ार कर रही थी.मैं थोड़ा घबरा गया और मैंने कहा- दीदी दीदी!!!तो दीदी बोली- मैंने तुमसे कहा था कि अकेले में मुझे दीदी नहीं डार्लिंग बोला करो.दीदी कुछ और बोलती इससे पहले मैंने उसका मुंह बंद करने के लिए अपने होंठ उनके होंठो पर रख दिये और टी-शर्ट के ऊपर से ही उनके चूचे मसलने लगा तो दीदी मचल उठी. मैं और दीदी कार में बैठे और हम घर कि तरफ चल दिये मगर दीदी शांत बैठी थी. मैंने दरवाजा खोलना चाहा तो दरवाजा फिर से बंद था.मुझे समझते देर न लगी और मैंने खिड़की से झाँका तो मैंने जो सोचा था उससे ज्यादा देखने को मिला. फिर मैंने आनंदी को देखा और उसके होंठो पर अपने होंठ रख दिये और उसे बाहों में उठा कर सिड के कमरे में ले गया. ये कहानी आप हमारी वासना डॉट नेट पर पढ़ रहे है.मैंने देखा कि चूत पर एक भी बाल नहीं था शायद अंजू ने अपनी चूत की ताजी-ताजी सफाई की थी.















