हा हा हा …..लगता है आज मर जाउंगी!!” विदिशा कहने लगी.मैं बिना कुछ बोले उसकी गांड फाड़ रहा था। उसका हलुआ बना रहा था। वो कुतिया बनी हुई थी। अब मेरी वासना और बढ़ गयी। अचानक मैंने उसके दोनों चूतड़ पर कस कसके चांटे मारने शुरू कर दिए। अब विदिशा को और कस्ट मिलने लगा। उई उई करने लगी।“चुप साली!! अपनी क्यों उई उई करती है!! हिंदी XXX ऊँ…ऊँ…ऊँ….”करने लगी। काफी देर तक मैं उसके पिछवाड़े से खेलता रहा। फिर उसकी गांड पर पहुच गया।विदिशा की गांड क्या खूब थी। लाल लाल दिख रही थी। मैं जीभ लगाकर चाटने लगा। उसकी चींखे निकलवा दी। वो उम्म्म्म उंह उंह करने लगी। मैं किसी ठरकी आदमी की तरह जल्दी जल्दी चाटकर साफ़ करने लगा। विदिशा कुतिया बनी रही। अब अपने 7 इंच के लंड महाराज को पकड़कर उसके पुट्ठे पर प्यार वाली थपकी दे रहा था। विदिशा मस्त हो गयी थी। कुछ देर उसके फूले फूले पुट्ठो की पिटाई की। फिर गांड के छेद में लंड घुसाने लगा।“सूरज भैया!! चल बिस्तर पर चलते है” विदिशा भाभी कहने लगी.“पहले मेरे लंड को चूस अच्छे से” मैं बोला.विदिशा कारपेट पर ही बैठ गयी। मेरी बेल्ट खोलने लगी। मेरी पेंट उतार दी। फिर नीचे कर दी। मेरे नेकर को नीचे की। मेरा 7 इंच का लंड महाराज उसके सामने प्रकट हो गया। उम्म्मम!!















