तो तब मैंने कहा कि नहीं भाभी, यह मेरा पहला मौका है।फिर इतना सुनते ही उन्होंने मेरा अंडरवेयर नीचे खींच दिया और मेरे लंड को झट से बाहर निकालकर पकड़ लिया। तब मैंने भी तुरंत उनकी पेंटी को पकड़ा और नीचे खींच दिया। अब हम दोनों पूरे नंगे हो गये थे और पलंग पर लेट गये थे।फिर मैंने भाभी की पहले चूचीयों को मसलना शुरू कर दिया और उन्हें अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। तब वो सिसकारी लेती हुई बोली कि और ज़ोर से संजय और ज़ोर से, आज मेरी इन चूचीयों का सारा रस निकाल दे और सब कुछ पी जा। अब मेरा जोश बढ़ता जा रहा था।अब में इतने में उनकी चूचीयों दबाता हुआ नीचे आने लग गया था। अब मेरे होंठ उनके शरीर के हर हिस्से को चूमते जा रहे थे। फिर जब में उन्हें चूमते हुए उनकी चूत तक पहुँचा तो तब उन्होंने मुझे रोक लिया और कहा कि संजय में भी बहुत प्यासी हूँ।अब में उनका मतलब नहीं समझ सका था। तब वो तुरंत अपनी साईड बदलकर मेरे पैरों की तरफ आ गयी। अब मेरा मुँह उनकी चूत की तरफ और मेरा लंड उनके मुँह की तरफ हो गया था। फिर मैंने अपने हाथ से उनकी चूत को मसला और अपनी एक उंगली उनकी चूत में घुसा दी।उनकी चूत में बिल्कुल गर्म भट्टी की















