उसका बहुत बड़ा लंड था और उसका सुपाड़ा मेरे मुहं में बहुत मुश्किल से आ रहा था.में उसके लंड को अब लगातार अंदर बाहर करके किसी रंडी की तरह चूसने लगी. में और मेरे पति साथ साथ चल रहे थे, तभी अचानक एक ज़ोर भीड़ आई, जिसकी वजह से में और मेरे पति अलग अलग हो गये.तब मेरे पास मोबाइल भी नहीं था. XXX Hindi लेकिन में तो बस अपनी चुदाई के लिए तरस रही थी. बीच वाली सीट पर हम तीन लोग बैठे गए थे.उस गाड़ी के सभी शीशे काले रंग के थे जिसकी वजह से बाहर वालों को अंदर कुछ भी नहीं दिखता था. में मन ही मन उसके साथ जाने को तैयार हो चुकी थी, लेकिन अब उसको थोड़ा नखरा दिखा रही थी और फिर मैंने उससे कहा कि मेरे पति यात्रा में है.वो बोला कि कोई बात नहीं मिल जाएगे, यहाँ से कहाँ जाएगे. में उसकी चुदाई से बहुत खुश थी, वो मुझे कभी अपने घर पर तो कभी मेरे घर पर तो कभी फार्म हाऊस में ले जाकर चोदता और में उसके साथ बहुत मज़े करती. मैंने उससे कुछ नहीं कहा और वो इस बात का लगातार फायदा उठाता रहा.फिर कुछ देर बाद यात्रा रुक गई थी और अब धक्के पे धक्के लग रहे थे और इस बात का फायदा उठाकर उसने अपना लंड मेरे चूतड़ पर सटा दिया















