आज उसमें जान आ गई थी।मैं समझ गई थी कि ये सब मेरे भद्देपन के कारण ही हुआ है। मैं बिना कुछ बोले अपने कमरे में वापस आ गई। सुबह भी मैंने किसी से कुछ नहीं कहा, बस अंकिता का सामान बांध कर वापस भेज दिया। अंकिता अपनी सफाई देना चाहती थी, पर अब सफाई सुनने का कोई फायदा नहीं था और मेरे पति ने तो सफाई देना तो दूर, उनके चेहरे पर कोई शिकन तक नहीं आई थी। मैं भी अन्दर ही अन्दर घुट के रह गई।ऐसे ही दिन बीतने लगे, मुझे खुद से घिन आने लगी.. XXX Hindi आज देख तेरी योनि की कैसे चटनी बनवाती हूँ।मैं डर गई, या कहिए कि डरने का नाटक करने लगी। तब तक जेठ जी अपने कपड़े उतार चुके थे.. प्लीज दीदी… फिर मैं अपना वादा पूरा करने के लिए तैयार हूँ।जेठानी भी एक स्त्री ही थी, सो उसने मेरी व्यथा समझ कर ‘हाँ कह दी.. मैं करती रही, मैंने अपने मन से कुछ भी अतिरिक्त करने का प्रयास ही नहीं किया।फिर उन्होंने अपने अंतर्वस्त्र भी निकाल फेंके, उनका लिंग 7 इंच का सीधा लंबा काला और मोटा था। लिंग में तनाव भी साफ नजर आ रहा था। वो मुझे बिस्तर में लेट कर पैर को फैलाने बोले, मैं यंत्रवत उनकी आज्ञा का पालन करती रही।फिर वो मेरे ऊपर चढ़ कर मेरे पर्वतों को दबाने लगे,















