अपने रस की एक-एक बूँद पिला दी।’‘अच्छा यह बताओ कि मेरे रस कैसा लगा?’‘यह तो मैं नहीं बताऊँगा। तुम मेरा लौड़ा चूसो और इसके स्वाद को अपने आप जान जाओ।’‘अरे इतनी सी बात… ये लो मेरे राजा!’ इतना कहकर नंगी पुष्पा घुटने के बल बैठ गई और मेरे लोड़े को पकड़ कर आगे की चमड़ी को हटा कर अपने जीभ से उस भाग को चाटने लगी। वो इस प्रकार उस हिस्से को चाट रही थी जैसे छोटा बच्चा खाना खाने के बाद अपने जीभ से अपने हथेली को चाटता है, ठीक उसी प्रकार से वो मेरे लण्ड को चाट रही थी।फिर उसने मेरी गाण्ड के छेद में अपनी उँगली से सहला कर मेरे लौड़े से अपने मुख को चोद रही थी। उसके इस तरह के मुख चोदन से मुझे लग रहा था कि मैं अब झड़ा कि तब झड़ा। करीब पंद्रह मिनट के बाद मैं उसके मुँह में झड़ गया।पुष्पा ने भी मेरे वीर्य की एक-एक बूँद ठीक उसी प्रकार चूस की जैसा कि मैंने उसके किया था। जब उसने मेरे लौड़े को छोड़ा तो लौड़ा इस प्रकार दिखाई पड़ रहा था कि जैसे बच्चे की छुन्नी। मेरे लौड़े या यूँ कहें कि छुन्नी को देख कर हँसने लगी और कहने लगी- देख तो दीपक मैंने तेरे लौड़े का क्या हाल कर दिया।मैंने कहा- तू इतन अच्छा चूसती है, इसका तो ये















