वो धीरे धीरे मेरे लण्ड को सहलाने लगी उसकी उंगलियो की गर्मी से मेरा लण्ड खड़ा होने लगा और कुछ ही पल में एक दम छत की तरफ खड़ा होकर तन गया.वो- हथियार तो चोखा है.मैं- क्या.वो- कुछ नहीं.उसने दोनों हाथों से मेरे लण्ड को पकड़ लिया और ऐसे करने लगीं जैसे मुठिया रही हो.मैं- ऐसा मत करो.वो- देखना तो पड़ेगा न.मैं- आपके स्पर्श से गुदगुदी होती है और जब ये तनता है तो फिर दर्द होता है.वो- तुझे अच्छा लगा मेरा स्पर्श.मैं- हां, पर दर्द.वो- नीला हुआ पड़ा है तो साफ़ है कोई डंक रह गया होगा मैं गर्म पानी लाती हु इसको साफ़ करुँगी फिर डंक देखूंगी.कुछ ही देर में वो एक कपडा और पानी ले आयी वो उस कपडे से लण्ड को भिगो के रगड़ने लगी मुझे दर्द के साथ उस गर्माहट मे मजा भी आने लगा मेरा लण्ड झटके खाने लगा. वो मुझसे कुछ आगे चल रही थी तो न चाहते हुए भी मेरे मन के चोर की नजरें उनके इठलाते हुए नितंबो पर ठहर ही गयी थी.उस लचक ने मेरे मन में सुलगते वासना के शोलो को कुछ हवा सी दे दी थी. हिंदी XXX सुबह जब जागा तो नीलम चारपाई के पास ही खड़ी थी. एक जगह बैठ कर मैं ऐसे ही सोच रहा था की मुझे पंप हाउस वाली बात याद आयी.पेटीकोट और ब्लाउज़ में ताईजी को















