पर तब भी मेरी चूचियाँ वो दबा ही देते और बाहों में जकड लेते.एक दिन की बात है दीदी को अपेंडिक्स का ऑपरेशन होना था, रात में हॉस्पिटल में एक ही अटेंडेंट को रहना था, तो मम्मी वह रूक गई, रात के करीब ११ बजे हमलोग वापस आ गए, पापा किसी काम से बंगलुरु गए थे, घर में मैं और मेरे जीजाजी थे, बस घर आते ही उन्होंने मेरे चूचियों को दबाना सुरु कर दिया, किश करने लगे होठ पे.मुझे लगा की शायद ये मेरे लिए ठीक नहीं होगा पर मैं भी फिसल गई उनके प्यार में और गले लगा लिया अपने प्यारे जीजू को, फिर क्या था उन्होंने मुझे गोद में उठा के बेड पे ले गए, उन्होंने मेरे टी शर्ट को उतार दिया, मेरा मस्त चूच अभी तक ब्रा के अंदर था पर ऊपर से देख कर उनके मुह से निकला वाओ फिर वो पीछे से मेरे ब्रा के हुक को खोल दिए.क्या बताऊ दोस्तों वो ऐसे मेरे बदन पे टूट पड़े जैसे की प्यासे को पानी मिल गया हो,मैं भी उतना ही प्यासी थी, मैं भी उनके होठो को चूसने लगी, उनके छाती के हलके हलके बालों को सहलाने लगी, उन्होंने मेरे दोनों हाथ ऊपर कर दिए और मेरे कांख के बाल को चाटने लगे, मुझे अजीब सी सिहरन और गुदगुदी होने लगी पर बहुत अच्छा लग रहा था















