इधर मैं लज्जित होते जा रहा था. एक बार तो इसके नाम पे हिलाता ज़रूर होगा. हिंदी XXX थोड़ी देर बाद मैने सेठानी को बर्थ पे लिटा दिया और उसकी चूत चूसने लगा. जैसे कि सेठ जी बड़े आदमी थे और बहुत पैसेवाले थे उन्होने 6 लोगो का 1 पूरा एसी कॉमपार्टमेंट ही बुक करवाया था. स्वर्ग कैसा होता होगा… मैने अब रफ़्तार बढ़ाई और ज़ोर के झटको के कारण बहू सहेम सी गयी और उसका हिलना अचानक बंद हो गया.तो सेठानी ने उसके मूह पे बोतल से निकाल कर पानी मारा, वैसे वो फिरसे चिल्लाने लगी और मेरे लंड को निकालने की मिन्नते करनी लगी. मैने सेठानी की सारी खोलनी शुरू की और फिरसे सेठानी का सौन्दर्य मेरी नज़रो से मैं देखने लगा.अब मैने सेठानी का पार्कर भी खोल दिया. अब मैने धीरे धीरे झटके मार के पूरा लंड अंदर डाल दिया. उधर बहू ने सेठानी के मूह मे बड़ा सा कपड़ा डाल दिया. थोड़ी देर बाद मैने सेठानी को बर्थ पे लिटा दिया और उसकी चूत चूसने लगा. हम सब की सासे जगह पे ही रुक गयी. अब मैने धक्को की रफ़्तार बढ़ा दी और थोड़ी ही देर मे सेठानी के पानी के साथ मेरा भी वीर्य निकल गया.मैने सेठानी की चूत से लंड निकाल के उस पर थूक कर सेठानी के मूह मे घुसेड़ने लगा.










