ऐसी बात है तो आप तो महीने में सिर्फ़ दो तीन बार ही…”“दो तीन बार ही क्या?”“ओह हो, मेरे मुँह से गंदी बात बुलवाना चाहते हैं”“बोलो ना मेरी जान, दो तीन बार क्या.”” अच्छा बाबा, बोलती हूँ; महीने में दो तीन बार ही तो चोद्ते हो. हिंदी XXX नाइटी थोड़ी सी पारदर्शी थी. एक दिन मैने उनके कमरे में मोटा सा खीरा देखा. मैं भाभी की टाँगों के बीच में बैठ कर उनकी पीठ पर तैल लगाने लगा. पसीने से मेरे कपड़े भीग चुके थे. मेरे दिल की धड़कन तेज़ होने लगी. अब भाभी पेट पर और लंड के चारों तरफ जांघों पर मालिश करने लगी.मेरा लंड बुरी तरह से फंफनाने लगा. निकाल ले सतीश, अपनी ही भाभी को चोद रहा है.” मैं भाभी की चुचिओ को मसल्ते हुए बोला-“अभी तो आधा से थोड़ा ही ज़्यादा गया है भाभी, एक बार पूरा डालने दो फिर निकाल लूँगा.” “हे राम! एक बार सनडे को मैं घर पर था. बस!!”” मधु, तुम्हारे मुँह से चुदाई की बात सुन कर मेरा लंड अब और इंतज़ार नहीं कर सकता. वही कहते होंगे.”“वही क्या भाभी?”“ओह हो बाबा, चूत और क्या.” भाभी के मुँह से लंड और चूत जैसे शब्द सुन कर मेरा लंड फंफनाने लगा. भाभी के मुलायम हाथों का स्पर्श बहुत अच्छा लग रहा था. मैं छत पर पढ़ने जा रहा था. लगता है तेरी शादी जल्दी ही










