हाय हाय.. हिंदी XXX चिप चिपा और नमकीन.. यूँ समझ लीजिये कि हर तरह की बुर का स्वाद चखना चाहता था। हर तरह की चूत के अंदर अपने लंड को डालना चाहता था। लेकिन मेरी शुरुआत तो देशी चूत से हुई थी, उस समय मैं सिर्फ बाईस साल का था। मेरे पड़ोस में एक महिला रहती थी, उनका नाम था गरिमा और उन्हें मैं गरिमा आंटी कहता था।गरिमा आंटी की उम्र 45-50 के बीच रही होगी, सांवले रंग की और लम्बे लम्बे रेशमी बाल के अलावा उनके चूतड़ काफी बड़े थे, चूचियों का आकार भी तरबूज के बराबर लगता था। मैं अक्सर गरिमा आंटी का नाम लेकर हस्तमैथुन करता था। एक शाम को मैं अपना कमरा बंद करके के मूठ मार रहा था। मैं जोर जोर से अपने आप बोले जा रहा था-यह रही गरिमा आंटी की चूत और मेरा लंड… आहा ओहो ! मैं एकदम से बोल पड़ा।“ठीक है!” यह कह कर आंटी सामने वाले सोफ़े पर टांगें फैला कर बैठ गई। अब उनकी बुर के अंदर का गुलाबी और गीला हिस्सा भी दिख रहा था। मैं पूजा की थाली लेकर आया, सबसे पहले सिन्दूर से आंटी की बुर का तिलक किया, फिर फूल चढ़ाए उनकी चूत पर, उसके बाद मैंने एक लोटा जल चढ़ाया। अंत में दो अगरबत्ती जला कर बुर में खोंस दी और फिर हाथ जोड़ कर बुर देवी की















