उसकी तीली में ऐसी सीलन है जो बार-बार घिसने पर जलती होगी….और जलकर फंूक से बुझ जाती होगी।’’वह कह तो सही रहे थे। वाकही अबरुद्दीन था ही ऐसा। वह आग लगाना तो जानता था बुझाना उसके बस का नही था। उस दिन गुसलखाने से निपटने के बाद पवूरा दिन जेठ ने मुझे ले जाकर अपने बैडरूम मे सताया। अबरुद्दीन रात को आठ बजे ड्यूटी पर आया, तब तक मुझे थका-थका कर जेठ ने चूर-चूर कर डाला था।उस दिन के बाद जब अबरुद्दीन की ड्यूटी रात की होती तो, आधी रात के वक्त जेठ मेरे बैडरूम में घुस आते थे। मैं बीबी अबरुद्दीन की थी पर पूरी भोग्या जेठ बन गयी थी। जल्द ही मैं उम्मीद से हो गयी तो अबरुद्दीन को झटका लगा। क्योंकि तीन माह से वह लगातार इलाज करवा रहा था।इस दौरान उसे पत्नी के पास जाने की सख्त पाबन्दी थी और वह इस पर अमल भी कर रहा था। मेरे पैर भारी हुए तो दब्बू और अर्ध नपुंसकता का शिकार अबरुद्दीन एकदम मर्द बन गया। मुझसे सख्ती से पूछ-ताछ की। इससे पहले कि वह मुझ पर किसी बाहरी व्यक्ति से मुंह काला करने का इल्जाम लगा पाता, मैंने जेठ की करतूत का भाण्डा फोड़ कर दिया।वह चुप हो गया पर उसके मन के अन्दर एक तूफान मचलने लगा। एक सप्ताह के अन्दर-अन्दर उसने फैक्ट्री एरिया में आवास के लिए















