बैगनी रंग तो जल्दी छूटता भी नही है??” मैं मुंह फुलाकर बोली.“साली साहिबा!! हिंदी XXX आप भी कमाल है!” मैं कह रही थी.फिर कुछ देर पीछे से मेरी चूत चाटते रहे। अपना 8” का मोटा लंड अंदर डाल दिए। मेरी कमर पकड़ कर जीजू मुझे चोदने लगे। मैं “उ उ उ उ उ……अअअअअ आआआआ… सी सी सी सी….. बैगनी रंग तो जल्दी छूटता भी नही है??” मैं मुंह फुलाकर बोली.“साली साहिबा!! दीदी तो हमेशा घर में ही रहती है” मैंने कहा.“कुछ तो जुगाड़ करना होगा। होली का बहाना बनाकर तेरी चूत चोद लूँगा” जीजू ने अपना प्लान बताया.फिर शुक्रवार वाले दिन होली थी। जीजू बृहस्पतिवार को ही घर आ गये। मेरी दीदी 10 दिन पहले ही हमारे घर आ गयी थी। अगले दिन होली का खेल होने लगा। जीजू का हक होता है की साली को रंग लगाये। जीजू ने सुबह होते ही मुझे रंग लगाना शुरू कर दिया। मेरी दीदी को कोई शक नही हुआ। फिर जीजू मेरा हाथ दबाने लगे। मैं उनका इशारा समझ रही थी। वो मुझे आँखों से इशारा करके छत वाले कमरे में जाने को कहने लगे। मैं समझ गयी।“नही जीजू!! दीदी तो हमेशा घर में ही रहती है” मैंने कहा.“कुछ तो जुगाड़ करना होगा। होली का बहाना बनाकर तेरी चूत चोद लूँगा” जीजू ने अपना प्लान बताया.फिर शुक्रवार वाले दिन होली थी। जीजू बृहस्पतिवार को ही घर आ















