हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” चिल्लाने लगी। उसने चुदाई रोक कर पूछा- “कहाँ गिराऊं अपना माल” मैंने उसका लंड अपने मुह में ले लिया। उसने पूरा माल मुह में गिरा दिया। उसका गाढ़ा सफ़ेद माल पीकर मैंने चैन की सांस ली। उसके बाद मैंने अपना कागज पत्र लेकर चली आई। मै उस चुदाई को आज तक नही भूल पाई। आज भी मौक़ा मिलता ही उसके दुकान में ही सेक्स कर लेते है। “Cyber Cafe Me Sex”अपने दोस्तों के साथ शेयर करे- मैंने कहा- “कल रविवार है। तुम्हारी दुकान बंद रहेगी”.अरुण- “जिसको चोदने को इतनी खूबसूरत लड़की मिल रही है, उसके लिए एक तो क्या मैं कई रविवार को अपनी दुकान खोल सकता हूँ” मेरी जान कल दोपहर 12 बजे तक मैं तुम्हे चोदने के लिए आ जाऊँगा।मै- “ठीक है मैं भी आ जाऊंगी”.इतना कहकर मै अपने घर चली आयी। मै चुदने की ख़ुशी में पागल हो रही थी। मै मन ही मन सोचने लगी “बाप रे कल इतनी कड़ाके की गर्मी में ये दोपहर में चोदेगा मै तो मर ही जाऊंगी। फिर भी दूसरे दिन मै उसके दुकान के सामने जा पहुची। वो बाहर ही खड़ा मेरा इंतजार कर रहा था। “Cyber Cafe Me Sex”उस दिन अरुण बड़ा स्मार्ट लग रहा था। मै तो टाइम से पहुच गई थी। लेकिन वो तो मुझसे पहले ही इतने धूप मे चुका था। तेज की धूप में कोई घर के बाहर नहीं दिख रहा था। सारे लोग अपने अपने घरों में थे। मै जल्दी से उसके दुकान















