हूँ… हूँ..हमममम अहह्ह्ह्हह..अई…अई…अई…..” कहता जा रहा था। उसे अत्यधिक सुख और संतोष की प्राप्ति मिल रही थी। मैंने उसका लंड इतना चूसा की मेरी सारी लिपस्टिक छूट गयी और मनीष के लौड़े पर लग गयी।उसका लंड अब 10” लम्बा किसी रसियन लंड की तरह दिख रहा था। मैंने 15 16 मिनट हाथ में लेकर फेटा और अच्छे से खड़ा कर दिया। तभी मेरी सहेली दिव्या जल्दी जल्दी पीछे से मेरी गांड के छेद में जीभ लगाकर चाटने लगी। मैं पागल होने लगी।“आओ प्रतिमा! XXX Hindi तेरा पति तुझे कैसे चोदता है??” वो पूछने लगी.“वो बिस्तर पर लिटाकर चोदता है। कभी कभी घोड़ी बनाकर गांड मारता है” मैं बोली.“मेरा पति मनीष तो पहले अच्छे से मेरी चूत पीता है। उसके बाद मेरे हाथ पैर को बेड से बांध देता है। उसके बाद जानवरों की तरह मेरी चूत और गांड मारता है” दिव्या बोली.“कभी मुझे भी अपने मर्द का रसीला लंड खिला दे!!” मैं मजाक मजाक में कहने लगी.“तेरा जुगाड़ करवा दूंगी” दिव्या बोली.दोस्तों कुछ दिन बाद हम दोनों सखियाँ साथ में बैठकर ब्लू फिल्म देखने लगी। न तो मेरे बच्चे थे और न ही दिव्या के। इस वजह से कोई डिस्टर्ब करने वाला न था। सामने टीवी में बड़ी खतरनाक वाली चुदाई चल रही थी। मर्द औरत को घोड़ी बनाकर जल्दी जल्दी चोदे डाल रहा था।औरत “..अहहह्ह्ह्हह स्सीईईईइ….अअअअअ….आहा …हा हा सी सी सी” चिल्ला रही










