तभी सुनील दीदी के बिल्कुल पीछे खड़ा होकर दीदी के दोनों तरफ से हाथ बढ़ाकर नल के टूटे हिस्से पर दबे दीदी के हाथों पर दबाव देने लगा और बोला कि रुकिये, जब में बोलूं तो छोड़कर झुककर मेरे बाजुओं के नीचे से निकल जाना।तभी दीदी को सुनील की मजबूत छाती उसकी पीठ पर घिसती हुई महसूस हुई, लेकिन वो हिल नहीं पाई। फिर अगले ही पल में सुनील ने हिम्मत दिखाते हुए अपने तने हुए लंड को दीदी के चूतड़ो के बीच में लगा दिया और चिपक गया। अब दीदी को अजीब सा अहसास हुआ और वो थोड़ी आगे आ गई, लेकिन सोचा कि मज़ा आ रहा है तो थोड़ा मजा करने में क्या जाता है?फिर दीदी भी अपनी कमर को पीछे ले जाकर सुनील से चिपक गई, तो सुनील झूम उठा और गर्म होने लगा। फिर दीदी भी मौका देखकर घिसती हुई झुकी और उसके चंगुल से छूट गई। फिर सुनील ने नल फिट किया और बाहर आकर दीदी से कहा कि अब सब ठीक है। अब दीदी बाहर भीगी बैठी थी और बदन पर चुन्नी डालकर बात कर रही थी। अब वो गर्म हो चुकी थी, उसे बहुत दिनों के बाद किसी मर्द ने इस तरह से छुआ था।दीदी – तो तुम्हारी फीस कितनी हुई?अब सुनील को लगा कि उसका खेल ख़त्म हो गया है, अब वो इस बदन








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