इस कारण, शरम और संकोच का, यहाँ कोई काम नहीं था..मैंने मम्मी को खुशी से, अपनी बहन से फोन पर बात करते सुना की यहाँ इतनी आज़ादी है की चाहे तो पूरे नंगे होकर, सी बीच पर दौड़ लगाओ… कोई, देखने वाला नहीं है… गेस्ट हाउस के पीछे, जो स्विमिंग पूल है उसमे नीला आसमान ऐसा दिख रहा था मानो ज़मीन पर उतर आया हो। कुल मिलाकर, हमारा “जैक पॉट” ही लग गया था…अगली सुबह, जब मैं सोकर उठा तो मम्मी नहीं दिखीं। मैं उन्हें ढूंढने के लिए, दूसरे कमरे में गया। जहाँ पर, वह अलमारी खोल कर उसमें अपने साइज़ के स्विमिंग कॉस्ट्यूम्स देख रही थीं और मुझे देखकर कहने लगीं की चलो, तुम भी चेंज कर लो और हम दोनों स्विमिंग करेगे…मैं तो कब से, मौका ही देख रहा था। जल्दी से, फ्रेश होकर फटाफट पूल साइड पर पहुँचा तो देखा की मम्मी ने पहले ही ब्रेकफ़स्ट का सारा समान पूल साइड पर रखवा कर, काम वाली बाई से सभी काम करवा कर, उसे चलता कर दिया था।अब वहां पर, मेरे और मम्मी के अलावा कोई नहीं था। थोड़ी देर बाद, वहां मम्मी आईं तो मेरा तो दिमाग़ ही खराब हो गया। उस समय, उन्होंने जो स्विमिंग कॉस्ट्यूम पहना था वो शायद उनके साइज़ से एक साइज़ कम था..















