हा हा हा… ऊऊऊ… ऊँ.. हिंदी XXX ऊँ—ऊँ…ऊँ….” की आवाज निकाल कर सुसुक रही थी। सतबीर मेरी चूत के दाने को काट काट कर मेरी चूत की आग में घी डालने का काम कर रहा था। इधर जस्सी भी अपना लंड मेरी मुंह में डालें आवाजों को भी नहीं निकलने दे रहा था तभी सतबीर अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगा।मैं अब तो सिस्कारियां भी नहीं भर सकती थी। सतबीर मेरी चूत में अपना लंड धक्के मार कर घुसा रहा था। मेरी चूत में उसने अपना आधा लंड घुसा दिया। मैं जोर से चीख पड़ी जस्सी ने जल्दी से अपने लंड को मेरे मुंह से निकाल लिया। वरना मै दर्द की तडप से उसका लंड काट सकती थी।मै जोर जोर से “मम्मी… मम्मी… सी सी सी सी.. तुमने मेरी चूत में ऊँगली करके मजा लिया और जस्सी तू भी बूब्स दबा कर मजा ले लिया। तुम लोगो को पता भी होना चाहिए मेंरा मन भी ऐसे मजे लेने को करता है.सतबीर: ठीक है तो तू भी जैसे चाहे वैसे मजे ले सकती है। लेकिन ये बात हम तीनों के अलावा और किसी को पता नही चलनी चाहिए.मैंने अपना सर हिलाते हुए हैं हाँ बोला। वो दोनों अब कुछ भी करने से डर रहे थे। मेरी चूत में आग लगाकर वो दोनो सरेंडर हो गए। मै भी कुछ ज्यादा नहीं कर पा रही थी।















