मैं मौसी के बदन के नीचे पूरा दबा हुआ था पर उस नरम टेप चिकने बदन के वजन का मुझे कोई गिला नहीं था इस पहली मीठी चुपचाप अंधेरे में की जा रही.चुदाई से मेरा लंड इस कदर मचला कि मैं दो मिनट की चुदाई में ही झड गया मुँह में मौसी का स्तन भरा होने से मेरी किलाकारी नहीं निकली, सिर्फ़ गोंगिया कर रह गया मौसी समझ गई कि मैं झड गया हु पर बिना ध्यान दिए वह मुझे चोदती रही जैसे उसे कोई फरक ना पड़ता हो.झड कर भी मेरा लंड खड़ा रहा, मेरी कमसिन जवानी का यह जोश था मौसी को यह मालूम था और उसकी चुनमूनिया अभी भी प्यासी थी उसकी साँस अब ज़ोर से चल रही थी और वह बड़ी मस्ती से मुझे खिलौने के गुड्डे की तरह चोद रही थी.पाँच मिनट में मेरा लंड मौसी की चुनमुनिया के घर्षण से फिर तन कर खड़ा हो गया था इस बार मैंने अपने आप पर काबू रखा और तब तक अपने लंड को झडने नहीं दिया जब तक एक दबी सिसकारी छोड़ कर मौसी स्खलित नहीं हो गई.मौसी ने करवट बदली और मुझे प्यार से चूम लिया वह हांफ रही थी, ठंड में भी उसे पसीना आ गया था उसके पसीने के खुशबू भी बड़ी मादक थी मेरे कान में धीमी आवाज़ में उसने पूछा कि चुदाई पसंद















