मेरी तो जैसे जान ही निकली जा रही थी। आंखों से आंसू टपकने लगे। मैंने टेलीफोन वाली डायरी ओर अपना मोबाइल उठाया ताकि छत पर जाकर शांति से अपने 2-4 शुभचिन्तकों को फोन करके बुला लूं।बता दूंगा कि पति-पत्नी का आपस में झगड़ा हो गया था और अर्चना कहीं चली गई है। कम से कम कुछ लोग तो होंगे मेरी मदद करने को। सोचता सोचता मैं छत पर चला गया। छत कर दरवाजा खुला हुआ था जैसे ही मैंने छत पर कदम रखा। सामने अर्चना फर्श पर दीवार से टेक लगाकर बिल्कुल शान्त बैठी थी।मुझे तो जैसे संजीवनी मिल गई थी, मैं दौड़ अर्चना के पास पहुँचा, हिम्मत करके उससे शिकायत की और पूछा, “जानू, बिना बताये क्यों चली आई। पता है मेरी तो जान ही निकल गई थी।”उसने होंठ तिरछे करके मेरी तरफ देखा जैसे ताना मार रही हो। पर गनीमत थी की उसकी आंखों में आंसू नहीं थे। मैं अर्चना के बराबर में फर्श पर बैठ गया, मोबाइल जेब में रख लिया और अर्चना का हाथ पकड़ लिया। मैं एक पल के लिये भी अर्चना को नहीं छोड़ना चाहता था पर चाहकर भी कुछ बोल नहीं पा रहा था। अभी मैं अर्चना से बहुत कुछ कहना चाहता था पर शायद मेरे होंठ सिल चुके थे।मैं चुपचाप अर्चना के बराबर में बैठा रहा, उसका हाथ सहलाता रहा। मेरे पास उस समय
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भोर में ही मेरा बड़ा लंड चाहने वाली भारतीय कामुक नौकरानी
Actors:
Indian Guy39 / Shivani
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