अब मैं हकले-हल्के धक्के मारते हुए अपने 8 इंच के लंड को करीबन 80% तक घुसा दिया. उसका पानी फिर से निकल गया. हिंदी XXX उसकी नज़रें रह-रह कर मुझ पर टिक जाती. तुम्हारा लंड….. सनाया और मैं दोनो एक दूसरे के जिस्म से अपने जिस्म को रगड़ रहे थे. खैर बात मकर सकरांति वाले किस्से की. उसके कड़क मम्मे मेरे हाथो में भरे हुए थे. मेरी बहन उसको जानती भी थी. अब वो उपेर-नीचे होते हुए अपनी चूत को मेरी जाँघो से टकराते हुए मेरे लंड को पूरा-का-पूरा अंदर ले रही थी. उसके हाथ मेरे सीने से फिसलते हुए मेरी जीन्स की चैन के पास आ गिरे. मेरी जांघे उसके चूतड़ से टकराती हुई मेरे लंड को उसकी चूत की पूरी गहराई तक पहुँचा रही थी.लेकिन 30-35 झटकों में ही सनाया का पानी निकलने लगा. उसके दमदार चूतड़ बार-बार मेरी झांघो पर गिरते और उपेर की और उठते हुए फिर से रगड़ मरते. मेरे निपल्स को पिंच करो…. मकान मालिक दूसरी जगह रहता है. दोस्तो इस साल मकर संक्रांति पर जो हुआ उस पर मुझे आज भी विश्वास नही हो पा रहा है. चोदो…. उसकी आँखे बंद होने लगी.मैने इसका फायदा उठाते हुए अपनी जांघो का ज़ोर उसके चूतड़ पर बढ़ा दिया.















