आप इस टाइम, सब ठीक-ठाक ना?”सचिन बोले, “हां, यार वो आज 9 बजे रात की ट्रेन से मुझे जयपुर जाना है कल वहाँ मेरी मीटिंग है एक कस्टमर से। तो तैयारी करनी थी इसीलिये जल्दी आ गया।”मैंने पूछा, “तो किस टाइम जाओगे स्टेशन?”सचिन बोले, “टिकट करवा ली है, अब 7 बजे निकलूंगा सीधे स्टेशन के लिये।”अब मैं तो फंस गई। अभिषेक मेरा इंतजार करेंगे। घर से कैसे निकलूँ, यही विचार कर रही थी कि मेरे मोबाइल की घंटी बजी। मैं समझ गई कि अभिषेक का ही फोन होगा पर अब कैसे बात करूं अभिषेक से, और क्या जवाब दूं अभिषेक को… सोचने का भी टाइम नहीं था। फोन बजकर खुद ही बंद हो गया। सबसे पहले मैंने फोन उठाकर उसको साइलेंट पर किया। तभी सचिन ने पूछा, “किसका फोन था?”मैंने जवाब दिया, “कुछ नहीं वो कम्पनी वालों के फोन आते रहते हैं, मैं तो दुखी हो जाती हूँ।”सचिन ने कहा, “बाद में मुझे याद दिलाना, मैं डी एन डी एक्टीवेट कर दूँगा।”“हम्म्म्म्म्म्म….” बोलती हुई मैं मोबाइल लेकर टायलेट में चली गई।तब तक देखा अभिषेक की 3 मिस कॉल आ चुकी थी। मैंने सबसे पहले अभिषेक को मैसेज किया कि मेरे पति घर आ गये हैं। मैं थोड़ी देर में निकल कर फोन करती हूँ। फिर सोचने लगी कि क्या तरकीब निकालूं।पर मैं उस समय खुद को बहुत बेचारा महसूस कर रही थी।















