बस फिर मैंने उसको कब तक चोदा, मुझे भी याद नहीं, बस याद है तो वो हसीन दर्द जो तब तक हर अजीज हरकत से बढ़िया था. और ना कुछ सुनाई दे रहा था और ना कुछ दिखाई दे रहा था.फिर मैंने धीरे से उसके चेहरे को ऊपर किया और उसके गालो को चुमा. हिंदी XXX पर मेरी अब तो हालत खराब हो चुकी थी और कोई कंट्रोल नहीं रहा था, मैंने एक दरिंदा बन चुका था, जिसको सिर्फ अंशिका के बदन से अपनी प्यास बुझानी थी.सारे रिश्ते नाते, साथ में खेलना, उसका मुझे राखी बांधना और भैया बुलाना सब में इस आग में भूल चुका था. पर यह चुदाई का चस्का ऐसा लगा है की मुझे आज रोज नयी चूत चाहिए, जवान नरम, जिस्माना गोश्त और उसकी महक मुझे पागल बना देती है. बस फिर मैंने उसको कब तक चोदा, मुझे भी याद नहीं, बस याद है तो वो हसीन दर्द जो तब तक हर अजीज हरकत से बढ़िया था. पहले सहलाता रहा और फिर दबाने लगा, वह कसमसा रही थी पर मजा भी ले रही थी.मेरा लंड खड़ा हो गया था और फटने को तैयार था, कच्चा भी गीला होने लगा था साला अंशिका की टांगों के बीच में बार बार टकराने लगा था. जब होश आया तो वह एक टूटी हुई गुड़िया की तरह पड़ी थी.अपने दोस्तों के साथ शेयर करे-















