अजीब सी है कुछ जानी पहचानी भी। लेकिन स्मेल अच्छी है।सूरजभान – बेटा ये स्मेल मेरे फैक्ट्री में लगे केमिकल की है। तुम्हे अच्छा लगता है तो तुम रोज मेरा हाथ स्मेल कर सकती हो।हर्षिता – ओके अंकलबहु को सूरजभान के लंड की महक लेते देख मेरा लंड फडकने लगा। लंच करते वक़्त मैं टेबल के नीचे एक हाथ से लंड निकाला। बहु के टाइट ब्लाउज में चूचि देख मुठ मारने लगा और फर्श पे पानी निकाल दिया। सूबह से बहु मेरा और सूरजभान दोनों के लंड का पानी निकाल चुकी थी। शाम को बहु रेड कलर की साड़ी पहने किचन में बर्तन धुल रही थी। मैं किचन में उसके पीछे एक टीशर्ट और लोअर पहने चाय की प्यालि लिए खड़ा बहु से बातें कर रहा था।हर्षिता – (अपनी साड़ी के पल्लू को कमर में खोसति हुई।) बाबूजी। आज रात सूरजभान अंकल यहीं रुकेंगे?मै – हाँ बहु।हर्षिता – ठीक। अगर ऐसा है तो मैं आपका कमरा ठीक कर देती हूं, उनको वहीँ कमरे में सोने दिजिये और आप मेरे कमरे में सो जाइये।मै – ठीक है बहु जैसा तुम्हे ठीक लगे।हर्षिता – कमरा थोड़ा साफ़ करना पडेगा। चीज़ें बिखरी पड़ी हैं बहुत दिन से हमलोगों ने साफ़ नहीं किया। मैंने बर्तन धूल लिए हैं आप अगर मेरी थोड़ी सी मदद कर दें तो मैं जल्दी से कमरा साफ़ कर दूँगी।मै – (बहु















