जब मैने लंड बाहर निकाला तो वो जोर से हाफ़ रही थी. XXX Hindi थोड़ी दे मे मैने बहू की पीले कलर की सारी और ब्लाउस उतार दिए. अब मैने उसे कुत्ति की तरह आसान बनाके के खड़ा कर दिया.और बोला “ये ले मेरी रानी… मन मे बोला तू तो अब गयी” मैने अपना लंड उसकी चूत के उपर लगाया.. स्टेशन पे पहुचते ही ममाजी ने मुझे सेठ जी से मिलवाया. उतने मे ही ट्रेन आ गयी. मैने अब सेठानी के चूत के दाने पे अपनी जीभ रख दी और उसे चूसने लगा सेठानी ज़ोर से तड़पने लगी और मेरा सिर पकड़ के अपने टाँगो के बीच मे दबाने लगी वैसे मैने और जोर से चूसना शुरू किया अब सेठानी बहुत ज़्यादा तड़पने लगी और कुछ देर बाद झाड़ गयी.उसकी चूत से निकल रहा वो निर्मल जल मैने अपने मुँह मे कर लिया वाह क्या मजेदार स्वाद था उसका. मैने निकर भी निकाल दिया और ब्लाउस भी, उसके कांख के बाल बहुत ही सुंदर थे, मैने उसे थोड़ा थोड़ा खींचना शुरू किया.उसके बाद मेरी नज़र गयी मदमस्त नाज़ुक चूत पे, जिसे देख के मेरे अंदर का जानवर जाग गया, चूत का रंग दोपेहर की ठुकाई के कारण अभी भी लाल था और उसमे से मेरे वीर्य की कुछ बूंदे भी टपक रही थी.















