लेकिन किसी भीड़-भाड़ वाली जगह ही ठीक रहेगा। कोई ज़्यादा फायदा भी नहीं उठा पायेगा और लगेगा भी बिलकुल स्वाभाविक।इस प्लान के साथ यास्मिन फिर से उसी मॉल में दाखिल हो गयी। उसने चारों तरफ अपनी नज़रें दौड़ाई और एक लंबे, हैंडसम लड़के को चुन लिया। वो लड़का भीड़ से भरे इस मॉल में अकेला खड़ा था। यास्मिन तेजी से उस लड़के की तरफ चलने लगी, यास्मिन ने जानकार के अपनी गर्दन दूसरी तरफ की हुई थी, लेकिन उसकी तिरछी नज़रें थी अपने शिकार पर ही।कुछ सेकण्ड्स में यास्मिन जानबुज कर उस लड़के से टकरा गयी। वो लड़का भी बिलकुल रिलैक्स मूड में खड़ा हुआ था, इसलिए लड़के का बैलेंस बिगड़ गया और दोनों एक साथ फर्श पर गिर गए। इस बार यहाँ मामला हाथ से निकल रहा था। गिरने से यास्मिन का बुरका उसकी जांघों तक उठ गया था।उसकी गोरी-२ जांघें दुनिया के सामने नंगी हो गयी थी। यास्मिन ने तेजी से उठने की कोशिश की लेकिन ये मामला तो बाद से बदतर होता जा रहा था। यास्मिन के बुर्के का हुक उस लड़के, मयंक की शर्ट में फंस गया था। अगर यास्मिन ज़ोर लगा के उठने की कोशिश करती तो उसका बुरका फट भी सकता था। या अल्लाह… कहाँ फंसा दिया बेचारी यास्मिन को?यास्मिन ने सबसे पहले अपने बुर्के को थोड़ा नीचे खींच कर अपनी जाँघों को ढका। कम से















