मेरी जान, सच्ची कहां छुपा रखे थे ये प्यारे-प्यारे दूधु तूने! हिंदी XXX बता ना और क्या किया था तुम दोनों ने?बस ना! तो मैं शरम से लाल हो गई उसकी बात सुनकर और उसकी एक चूची ज़ोर से दबाई तो वो चिल्ला कर हँस पड़ी- ऊऊउइ माँ उर्मिला। तो मैंने उसके होंठ चूम लिये।आकृति! सच्ची कितनी लम्बी ज़बान है तुम्हारी! कितनी मुलायम हैं!उइ सच्ची ? आ..इ..ए ऊ..ऊ..ओ..फ़ ना..आ..ही ना! मेरी जान, सच्ची कहां छुपा रखे थे ये प्यारे-प्यारे दूधु तूने! खूब बड़े बड़े बिल्कुल गुलाबी रंग, तनी हुई लम्बे चुचूक! मैं क्या करूँ!मेरा पूरा जिस्म सुलग रहा था और मैंने आकृति के नरम-गरम चूतड़ खूब दबाए और जब एकदम से उसकी चूत पर हाथ रखा तो वो तड़प उठी- ऊ..ऊ..उइ नी..ईइ..ना कर! मैं जल रही हूँ! और क्या किया था अजित ने बताओ न!तो मेरे दूध पर से अपने चिकने गुलाबी होंठ हटाते हुए मुस्कुरा कर बोली- और कुछ नहीं करने दिया मैंने!तो मैंने पूछा- क्यों आकृति! सच्ची बहुत मज़ा आ रहा है!मैं उसके सामने टॉपलेस बैठी थी, शर्म से मेरी बुरी हालत थी। मैंने अपने दोनों हाथों से अपने भरे-भरे दूध छुपा लिये और देखा तो आकृति ने भी अपना कुरता और ब्रा अलग अपने बद्न से हटा दिए थे और मैं उसे देखती रह गई- उफ़!















