प्रतिमा और रिशु दोनों पहली बार खुल कर सांस ले पा रहे थे. हिंदी XXX आँखें बंद किए वो अपनी माँ के मुंह में अपना लंड घुसेड़ता जा रहा था. जब रिशु बिलकुल पास आ गया तब उसने कहा “रिशु यार, क्या तू भी, कब से तेरा इंतज़ार कर रहे हैं, तू आया क्यों नहीं?“मेरी तबीअत ठीक नहीं थी, सर दर्द था, वैसे भी मेरा मूड नहीं है, तुम लोग खेलो”.“अरे नहीं यार, तेरे बिना बात नहीं बनेगी, चल ना यार”.“नहीं मैं नहीं जा सकता, मैंने तुझे बताया ना कि मुझे सर में बहुत तेज़ दर्द है” रिशु की आँखें अपने दोस्त की आँखों का पिछा कर रही थीं और उसका चेहरा लाल होता जा रहा था.“प्लीज यार चल ना, तूने प्रॉमिस किया था”.“मैने एक बार बोल दिया ना कि मैं नहीं जाऊँगा” रिशु एकदम भड़क कर बोला.उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था कि वैभव उसकी माँ के बदन को घूर रहा था. उसे आश्चर्य हो रहा था कि क्या वो सुगंध रिशु तक भी पहुँच रही थी? जिससे उसके अंगूठे और ऊँगली में उसका आकार बढ़ने लगा, जब उसकी जिव्हा को लंड का नर्म मुलायम एहसास होने लगा.“उफ्फ्फ यह तो खड़ा हो रहा है, मेरे बेटे का लंड खड़ा हो रहा है”, प्रतिमा खुद से कहती है.एक पल के लिए उसके मन में आया कि अब शायद उसे रिशु के लंड को छोड़















