मौका देख के रात में ऊपर आ जाना, सारे बाकी के अरमान भी पूरे कर लेना लेकिन प्लीज़ अभी नहीं, अभी दीदी है यहां … वो मुझे कच्चा ही चबा जाएँगी.” रज़िया ने बड़े प्यार से मेरे हाथों को अपनी चूचियो से हटाते हुए कहा और एक गाढा सा मीठा चुम्बन मेरे होठों पर जड़ दिया।चूंकि मैंने इस चुदाई के चक्कर में सुबह से कुछ खाया भी नहीं था सो इस वक़्त मेरे पेट में बड़े बड़े चूहे उछ्ल कूद कर रहे थे।मैंने रज़िया से पुछा, “कुछ खाने को है क्या, बहुत तेज़ भूख लगी है.”“हाँ दीदी ने नमकीन सेवइयां बनाई है क्योंकि अब खाने का वक़्त तो रहा नहीं, पूरा खाना शाम को बना लेंगे। वो आपको जगाने जाने ही वालीं थीं, अभी हम लोगों ने भी नहीं खाया है” रज़िया ने हमेशा की तरह बड़ी शालीनता से ज़बाब दिया.“तो चल जल्दी से सबका खाना लगवा ले, अब भूख बर्दाश्त नहीं हो रही है” मैंने बड़ी बेसब्री से कहा.तभी दीदी हाथ में सेवइयों की प्लेट लिए किचिन से आ गयीं और मुस्कराते हुए बोलीं, “मुझे मालूम था की तू उठते ही भूख भूख चिल्लाएगा.”उन्होंने व्हाइट कलर का वी गले का टॉप और नीले रंग का पेटीकोट पहन रखा था। पेटीकोट का नाडा कमर पर साइड में करके बांधा था जिससे उसके कट से उनकी नंगी कमर का गोरा गोरा थोडा सा















