अब फिर होली खेलते है, मैं हंस के टाल देता.. हिंदी XXX फिर एक दिन मैंने मज़ाक में कह दिया कि तो पिचकारी से खेलते हैं सफेद रंग लगा कर!इस पर वो मुझे नशीली नज़रों से देख कर मुस्कराने लगी। इतना था कि मैंने उन्हें पकड़ लिया.. वो कहने लगी- अभी नहीं, कोई देख लेगा। मैंने उनसे मिलने के लिए बोला, वो मान गई। फिर एक दिन उन्होंने मुझे रात के 11 बजे मिस कॉल दी… मैंने कॉल किया तो उन्होंने बाहर आने के लिए बोला। मैं तुरंत चला गया।भाभी जी बाहर इंतजार कर रही थी, वो मुझे सरसों के खेत में लेकर गई जहाँ से कुछ सरसों काट रखी थी। वहाँ पर उन्होंने एक दरी बिछाई जो पहले से ही वहाँ रखी थी। मैंने आव देखा ना ताव… भाभीजी को पकड़ के पागलों की तरह चूमने लगा…कभी होंट तो कभी उनकी छाती… कपड़ों के ऊपर से ही उनकी चुची को हल्का सा काट लेता.. वो कहने लगी- अभी नहीं, कोई देख लेगा। मैंने उनसे मिलने के लिए बोला, वो मान गई। फिर एक दिन उन्होंने मुझे रात के 11 बजे मिस कॉल दी… मैंने कॉल किया तो उन्होंने बाहर आने के लिए बोला। मैं तुरंत चला गया।भाभी जी बाहर इंतजार कर रही थी, वो मुझे सरसों के खेत में लेकर गई जहाँ से कुछ सरसों काट रखी थी। वहाँ पर उन्होंने एक दरी















