मैं नीलम के चेहरे पर आये भाव समझने की कोशिश कर रहा था पर कामयाबी न मिली.चाय ख़तम करके मैं कुछ देर इधर उधर चक्कर लगाया और फिर आके सो गया वैसे तो दिन में भी एक दो घंटे सोया था पर नींद जल्दी ही आ गयी. XXX Hindi वो मुझसे कुछ आगे चल रही थी तो न चाहते हुए भी मेरे मन के चोर की नजरें उनके इठलाते हुए नितंबो पर ठहर ही गयी थी.उस लचक ने मेरे मन में सुलगते वासना के शोलो को कुछ हवा सी दे दी थी. वो भी ताड़ गयी की मैं उसकी चूचियो को घूर रहा हु तो बोली- अछि लगी.मैं- क्या?वो- जो तू देख रहा है.मैं कुछ न बोला.वो- बताना अब मुझसे क्या पर्दा.मैं- सही है.वो- बस सही है.मैं- मतलब सुंदर है.वो अब मालिश भूल के जोर जोर से मेरे लण्ड को मुठियाने लगी थी उसने अपनी छातियों को और झुका लिया ताकि गहरायी तक मैं देख सकू, वो लगभग पूरी तरह मेरे लण्ड पर झुक चुकी थी. मैं भी पलँग पर चढ़ गया और उसे चूमने लगा वो मेरे लण्ड को अपनी चूत के छेद पर रगड़ने लगी.उसकी सिसकिया पल पल ये एहसास करवा रही थी की अब देर करना उचित नहीं, मैं भी इस फल को अब चखना चाहता था. मैंने अंदर झाँक के देखा तो नीलम की पीठ मेरी तरफ थी और वो,















