मै वही किनारे जाकर बैठ गया और काकी को घूरने लगा।काकी – बेटवा तेरी उंगली तो ठीक है ना.मै – हा काकी खून नही बह रहा लेकिन दर्द है.काकी – अरे बेटवा मेरी ही गलती है जो तुझ शहरी बाबू से फसल कटवाने जा रही थी.मै- नही काकी ऐसी बात नही है मै काट लेता फसल लेकिन ये चोट लग गई.और उठकर उनके सामने जाकर बैठ गया और उनकी चुचियो को खा जाने वाली नजरो से देखने लगा. हिंदी XXX अजय ने आवाज दी.अजय – चाची कहा बाडू हो?चाची – हा बेटवा, आवा बैठा.(उनका पल्लू जमीन पर गिरा था उकडू बैठे होने की वजह से उनके घुटने से चूचिया दबकर फूल गए थे) मै यह देखने लगा अजय जाकर खटिया पर बैठ गया मै दूर खडे होकर चाची के चुचियो को देख रहा था। लंड खडा होने लगा अचानक चाची की आवाज सुनकर होश आया.चाची – अरे अनमोल बेटवा कैसे हो.मै- (हडबडाते हुए) ठीक हू चाची।चाची – बहुत दिन बाद गाव आए हो पहचान रहे हो ना.मै- हा चाची।चाची- अरे अजय बेटा,रौशन कहा है उससे बोली थी मजदूर लगा दे मेरे खेतो मे कटाई करनी है सबका गेंहू कट गया मेरा अबतक नही कटा अकेली हू तो सारे काम बच जाते है।अजय- ठीक है रौशन भईया से बात करता हू.मै- काकी मै काट दू आपकी फसल मुझे मजदूरी दे देना.काकी – अरे बेटा तेरी















