आप सोये नही??” मैंने कहा और उनके दरवाजे को अंदर से बंद किया.“नींद नही आ रही श्रेष्ठा” जीजू किसी मुरझाये हुए फूल की तरह मुंह लटकाकर बोले.“आज मैं आपको नींद दिला दूंगी” मैंने कहा और अपने टॉप के उपर से चुनरी हटा दी।जीजू मेरी तरफ अजीब नजर से देखने लगे। “आज दीदी की कमी मैं दूर कुरुंगी” मैं बोली और जीजू के पास जाकर बेड पर लेट गयी। फिर उनको मैंने कसके पकड़ लिया और अपने सीने में दबा लिया। उसके बाद तो सब कुछ अपने आप होने लगा। जीजू का इंजन तो पिछले 6 महीने से बंद बड़ा था, आज वो फिर से शुरू हो गया।उन्होंने मुझे नीचे लिटाया और अपना मेरे उपर आ गये और फिर मेरे होठ को चूसने लगे। धीरे धीरे करके मेरी टॉप को उतरवा दिया। मैंने लाल रंग की स्कर्ट से मैच करती लाल ब्रा पहनी थी।मेरे 34” के दूध बेहद पुस्ट और रसीले दिखते थे। जब जीजू ने मेरे बड़े बड़े चूचको को ब्रा के उपर से दबाना शुरू किया.तो मैं सेक्सी होकर “……अई…अई….अई……अई….इसस्स्स्स्स्स्स्स्…….उहह्ह्ह्ह…..ओह्ह्ह्हह्ह….” करने लगी। कुछ देर तक वो उपर से मजा लेते रहे। फिर मेरे दूध को ब्रा के उपर से मुंह में लेकर चूसने लगे। कुछ देर में समा गर्म हो गया और मुझे अपने हाथ से अपनी ब्रा खोलनी पड़ी। फिर अपनी नंगी मस्त मस्त चूची को दोनों हाथ से हिला















