उह.. अजीब सा..”अब मुझे काटो तो खून नहीं। पर पिछले 5-6 घंटों में मेरे अंदर वासना कुछ ज्यादा उफ़ान पे थी। सो वासना ने जवाब दिया..“वो मैंने चाय-पत्ती डाल के कुछ ज्यादा उबाल दिया था।”मै अपने वासना पे मुस्कुराह रहा था। फिर बोला..“ज्यादा लिकर वाली चाय थकान उतार देती है।”वो ” हूँ..” बोल के चाय पीने लगी या यों कहें अपने शरीर को वासना के प्याले में उतारने लगी।उसके बाद मैंने उसपे करीबी नजर रखनी सुरु कर दी। थोड़ी देर बाद ही वो मुझे असहज लगने लगी। दवा अपना काम कर रही थी। मैं खुश था। मेरे लिंग ने अंगड़ाई लेनी सुरु कर दी थी। क्या मैं आज सफल हो जाऊंगा.. XXX Hindi मेरे पैर की उंगलियां उसको सहलाती हुई ऊपर आ रही थी। अब उसकी साड़ी उसके जांघो पे इकट्ठी हो गयी थी। और मेरे हाथ उसके नंगे जाँघों को सहला रहे थे.. मेरी आँखों में झांकते हुए वो गुर्राती थी..“आह.. और तभी चाची भी हल्की सी कुन-मुनाई। मै रुक गया.. चुदासी और गुदाज बदन वाली शादी-शुदा बुआ पे।और वो वक़्त जल्दी ही आगया……। उसके जाने के बाद ना जाने मैने अपने शुक्राणुओं को वीर्य के रूप में कितनी बार नाजायज बहाया और हाँ इसमे मेरे हाथो का पूर्ण योगदान था। कितनी राते मैंने अपने सोच में उसके साथ तरह तरह से सम्भोग किया था..















