मैं सोचने लगी। वापिस आई तो भुवन सर फिरसे भुवन सर मेरी छतियों को पिने लगे। करीब ढेड़ घण्टे तक वो मेरी छतियों को पीटे रहे। मैं भी चुसवाती रही।देख मानसी अब हम दोनों चुदाई करेंगे बिलकुल वैसे जैसे देख रहे थे। तुझे भी बड़ा मजा आएगा। भुवन बोले।मैं मासूम थी। मैंने सिर हिला दिया। भुवन सर ने मेरी जीन्स की गोल बटन खोल दी और उतार दी। सफ़ेद संगमरमर जैसी मेरे गोर 2 पैर देखकर वो मस्त हो गए। वो मेरे पैर की उँगलियों को चूमने लगे जगह जगह। मुझसे भी मजा आने लगा।उन्होंने मेरी हरे रंग की पंट्टी देखि और मेरी कुवारी चूत की खुसबू उनकी नाक में बस गयी। मेरी पैंटी गीली हो गयी थी। सायद मैं चुदासी थी और एक बार चुदवाना चाहती थी। भुवन सर ने अपनी जीब निकली और मेरी तितली को पैंटी के ऊपर से चूमने लगे। फिर वो मेरी कुंवारी चूत को पैंटी के ऊपर से ही चटने लगे। मेरे बदन में बिजली सी दौड़ने लगे। मेरा सरीर कापने लगा।भुवन सर ने पेरी पैंटी उतार दी। बाल सफा चिकनी मस्त कुंवारी गोरी बुर देखकर भुवन सर मसमस्त हो गए। एक कुंवारी लौण्डिया उन्हें इतनी आराम ने चुदवाने देगी उन्होंने कभी नहीं सोचा था। वो आइसक्रीम की तरह मेरी चूत चाटने लगे। मेरी चूत किसी सिम की तरह एक्टिव हो गयी थी।नमकीन खारा पानी निकलने















